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बेरुत हवाई-अड्डे पर फ़ंसे दो युवकों की कहानी

  किरीटनामा - 5

· hindi

विदेशों में नौकरी, मर्चेंट नेवी, क्रूज पर, जहाज पर नौकरी के नाम पर हमारे देश के युवाओं को जिस तरह से ठगा जाता है उन सभी घटनाओं से हमें सबक सीखना चाहिए. ये कहानी धोखाधडी का एक ऐसा उदाहरण है जिसे जानना और समझना बहुत जरुरी है.

6 अगस्त 2019 को देर रात मैं दिल्ली से मुंबई के लिए उडान पर था. मुंबई एयर पोर्ट पर जब मैं देर रात 6 अगस्त को (यानि 7 अगस्त को भोर से भी पहले) पहुंचा तो WhatsApp पर श्री विजय सोमैया द्वारा प्रेषित संदेश नजर आया जो इस प्रकार से था.

  • श्री विजय सोमैया के पुत्र श्री कुश सोमैया अपने एक मित्र ब्रिजेश राय के साथ लेबनान के बेरुत हवाई अड्डे पर मुसीबत में फ़ंस गए थे.
  • मैंने श्री विजय सोमैया से बात की तो जो जानकारी मिली उसे सुनकर मैं हैरान रह गया.
  • कुश और उसके मित्र ब्रिजेश को नवी-मुंबई के एक एजेंट ने मर्चेंट नवी में नौकरी के लिए भेजा था और बेरुत से उन्हें जहाज (Ship) पर जाना था.
  • 4 अगस्त 2019 सुबह कुश और ब्रिजेश दोनों मुंबई से बेरुत पहुंचे. लेबनान की पुलिस ने उन्हें बेरुत हवाई अड्डे पर ही रोक लिया था. उन दोनों के साथ मार-पीट की गई थी. विजय अपने पुत्र को लेकर बहुत ही परेशान थे क्योंकी उनका पुत्र से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था.

मैंने लेबनान के भारतीय दूतावास, भारत सरकार का विदेश मंत्रालय, मुंबई में BKC स्थित विदेश संचार निगम का विशेष कार्यालय इन सभी कार्यालयों में अधिकारियों से विभिन्न स्तरों पर बात की. इसके अतिरीक्त जब मैंने श्री ज्ञानेश्र्वर मुळे (विदेश विभाग के पूर्व विशेष सचिव), श्री जे. के. साहू (मुंबई विभाग के Immigration Officer, जो विदेश विभाग में कार्यरत हैं) और मेरे एक मित्र श्री संजय पाराशर जो मर्चेंट नेवी संगठन (Merchant Navy Association) के क्रियाशील सदस्य हैं, उनसे भी बात की.

लेबनान के भारतीय दूतावास के माध्यम से मिली जानकारी इस प्रकार थी.

भारतीय दूतावास के अधिकारी श्री शशीकुमार का जवाब इस तरह था

विदेश विभाग के श्री जे. के. साहू जी (BKC मुंबई विभाग के Immigration Officer) द्वारा दिखाई गई समयसूचकता और तत्परता बहुत ही सराहनीय थी. उन्होंने मुझे जानकारी भेजी वो इस प्रकार थी....

लेकिन इसके बाद मुझे जो जानकारी मिली वो बेहद चौंका देने वाली थी.

  • असल में कुश और ब्रिजेश को नई-मुंबई के मर्चेंट नेवी के एजेंट ने ठगा था.
  • नई-मुंबई का एजेंट गुरमीत (SMTF) युवाओं को “आपको छह महिने तक सुव्यवस्थित वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा” जैसे लुभावने प्रस्ताव देकर  प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रुपए फ़ीस के तौर पर लेता था. यही उसका व्यवसाय था.
  • वह यह भी दावा करता था कि उसकी संस्था भारत सरकार के विदेश विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त है.
  • छह महिने का पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद विद्यार्थियों को नौकरी की गारंटी भी दी जाती थी.
  • कुश और ब्रिजेश के अभिभावकों ने प्रशिक्षण के लिए लाखों रुपये फ़ीस के रुप में दिए थे. गुरमीत सिंह (SMTF) ने उन दोनों को नौकरी के लिए बेरुत भेजा था. उनसे कहा गया था कि बेरुत में एक स्थानीय एजेंट उन्हें लेने आएगा और जहाज (Ship) पर पहुंचा देगा.
  • उन दोनों को जहाज पर नौ महिने की नौकरी का प्रस्ताव/Contract दिया गया था. इस काम के लिए भी गुरमीत और उसके साथियों ने गैर-कानूनी रुप से लाखों रुपए ऐंठ लिए थे.
  • इस घटना की तह तक जाने के लिए मैंने विभिन्न अधिकारियों, विशेषज्ञों और जानकारों से चर्चा की. मैने पाया कि इस तरह का गोरखधंदा कई सालों से चल रहा है. युवाओं से लाखों रुपए जमा करके उन्हें विदेशी एजेंटों के या फ़िर जहाज के मालिकों के भरोसे पर छोड दिया जाता है. कभी कभी विदेशी भूमी पर नौकरी के बिना ही छोड  दिया जाता है.
  • कुश सोमैया का अनुभव इसी प्रकार का था. कुश जब बेरुत पहुंचा तो कोई स्थानीय एजेंट उसे लेने नही आया.
  • गुरमीत ने उन्हें 24 घंटे का अस्थाई वीजा दिया था. कुश और उसके मित्र ने गुरमीत से बेरुत से बात करने की कोशिश की परंतु संपर्क नहीं हो पा रहा था. बेरुत के हवाई अड्डे पर संचार व्यवस्था और Wi-Fi ठीक से काम नहीं कर रहे थे. इन दोनों युवा मित्रों की उम्र 18 साल से कुछ ही ज्यादा थी और दोनों भारी मुसीबत में पड गए थे.
  • 24 घंटे की वीजा की अवधी समाप्त होते ही बेरुत के Immigration अधिकारी/स्थानीय पुलिस ने दोनों को गिरफ़्तार कर लिया.
  • भाग्यवश एक सहयात्री ने कुश की मदत की और अपने मोबाईल फ़ोन  (Hotspot Connection) की मदत से उसने मुंबई में अपने पिताजी श्री विजय सोमैया को इस भयानक परिस्थिती की जानकारी WhatsApp के माध्यम से भेजी.
  • श्री विजय सोमैया ने यह जानकारी मुझ तक पहुंचाई कि पिछले तीन दिन से वे (कुश और ब्रिजेश) बेरुत हवाई-अड्डे पर फ़ंसे हुए हैं.

कुछ ही समय में मैंने श्री विजय को सूचित किया कि बेरुत में संपर्क हो गया है.

  • इस संपूर्ण सरकारी तंत्र में और समाज के कुछ अच्छे और कुशल अधिकारियों के माध्यम से हम बेरुत के दूतावास से संपर्क कर पाए.
  • भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने स्वयंप्रेरणा से कुश और ब्रिजेश से संपर्क किया.
  •  प्रवासी भारतीयों के रक्षक भी (The Protector of Immigrants,Mumbai) इस संदर्भ में प्रयत्न कर रहे थे.

श्री संजय पराशर सभी अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए थे. उन्होंने मुझे सूचित किया .....

विदेश मामलों के राज्य मंत्री श्री मुरलीधरन जी के उप सचिव श्री नंद कुमार जी ने कुश और ब्रिजेश को मुंबई वापस लाने में बहुत मदत की.

बेरुत के भारतीय दूतावास ने एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी.

चार दिन के कठिन संघर्ष के बाद देर रात 8 अगस्त को कुश वापस घर लौट आया.

लेबनान के भारतीय दूतावास ने ट्विट किया ..

भारतीय युवाओं को इस तरह अपारदर्शक तरीके से नौकरी के लिए विदेशों में भेजने की व्यवस्था के बारे में, मैं विविध स्तर पर संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी बात रख रहा हूं. विदेश में इन युवाओं की नौकरी और सुरक्षा के बारे में व्यवस्था में सुधार की बहुत जरुरत है. इसके लिए दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए.

  1. मर्चेंट नेवी में नौकरी के बहुत ही आकर्षक संभावनाएं उपलब्ध हैं. जहाज पर मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलवाने के लिए दर्जनों एजेंट गैरकानूनी तरीकों से लाखों रुपये प्रशिक्षण (Training) के नाम पर युवाओं से ले लेते हैं.
  2. अभिभावकों को इस बात की जांच कर लेनी चाहिए कि प्रशिक्षण संस्था भारत सरकार के “नौपरिवहन मंत्रालय” (Shipping Ministry) से मान्यता प्राप्त है भी या नहीं.
  3.  प्रशिक्षण के पश्चात विदेशी जहाजों पर नौकरी के लिए योग्य प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाना चाहिए.
  4. कानूनी रुप से अधिकृत एजेंट को ही भारतीय युवाओं को जहाज/क्रूज पर विदेशों में नौकरी के लिए भेजने का अधिकार दिया जाना चाहिए.
  5. अभिभावकों को भी जागरुक रहते हुए एजेंट के बारे में पूरी जांच कर  लेनी चाहिए. नौपरिवहन मंत्रालय (Shipping Ministry), विदेश मंत्रालय (External Affairs Ministry) वी. आर. मरीन टाईम सर्विस-शिपिंग (V.R Marine Time Services-Shipping) और  Defense & Power of Association द्वारा प्रमाणित/ अधिकृत एजेंट के माध्यम से आवेदन करना चाहिए.
  6. विदेश स्थित स्थानीय एजेंट के बारे में पूरी जानकारी लेकर उसे प्रमाणित कर लेना चाहिए. वीजा और अन्य सभी कागजात सरकारी व्यवस्था/तंत्र के माध्यम से लेने चाहिए.
  7. जो युवा नौकरी के लिए विदेश जाते हैं उन्हें विदेश के स्थानीय एजेंट के फ़ोन नंबर, भारतीय दूतावास के अधिकारियों के फ़ोन नंबर और भारत स्थित संबंधित अधिकारियों के फ़ोन नंबर की पूरी जानकारी अपने साथ रखनी चाहिए.
  8. भारतीय युवाओं को मर्चेंट नेवी के माध्यम से अपनी सेवाएं विदेशों में पहुंचाने का सुअवसर मिलता है. सरकार को इस दिशा में युवाओं की मदत करनी चाहिए.
  9. क्रूज और जहाजों पर नौकरी के लिए भारतीय युवाओं की ख्याती बहुत ही अच्छी है और इसलिए भारतीयों की वहां मांग भी बहुत है. हमें इसे बढावा देना चाहिए और साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि हम किसी जाल में न फ़ंसें. हमें अधिकृत माध्यम से ही यह प्रक्रिया को पूर्ण करनी चाहिए.
  10. और हां, अंत में बेरुत एयर पोर्ट पर मिले उस अनाम सहयात्री को नही भूल सकते जिसके Hotspot/Wi-Fi, WhatsApp की मदत से कुश सोमैया अपने अभिभावकों से संपर्क स्थापित कर सका. उसी की मदत से कुश और ब्रिजेश का भविष्य बिगडने से बच गया.

आईये हम ऐसी प्रणाली विकसित करें जिसकी मदत से मर्चेंट नेवी में जहाजों पर और क्रूज पर अपना भविष्य उज्जवल बनाने के लिए जो युवा जाना चाहते हैं उन्हें कोई परेशानी न हो.

 

-- किरीट सोमैया

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